करीब 15 महीने से किसान राठीखेड़ा क्षेत्र में धरना, विरोध प्रदर्शन, ट्रैक्टर रैलियाँ और महापंचायतों के ज़रिए अपनी आवाज़ उठा रहे थे।
10–11 दिसंबर 2025 को टिब्बी में बुलाई गई किसान महापंचायत के बाद हालात अचानक बिगड़ गए। सैकड़ों–हज़ारों किसान ट्रैक्टरों के साथ फैक्ट्री साइट की ओर बढ़े, निर्माणाधीन चारदीवारी को तोड़ दिया और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 14–16 से अधिक वाहनों, कुछ मशीनों और दफ़्तरों को आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसमें कई किसान, पुलिसकर्मी और एक कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया और मंगेज चौधरी के घायल होने की खबर सामने आई।
घटना के बाद पूरे टिब्बी–राठीखेड़ा क्षेत्र को छावनी में बदल दिया गया, भारी पुलिस बल व आरएसी की तैनाती की गई, इंटरनेट सेवाएँ अस्थायी रूप से बंद कर दी गईं और स्कूल–बाज़ारों को कुछ समय के लिए बंद रखने जैसे कदम उठाए गए। प्रशासन का कहना है कि क़ानून व्यवस्था तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी, जबकि किसान संगठन चेतावनी दे रहे हैं कि जब तक फैक्ट्री निर्माण पर रोक व संतोषजनक लिखित आश्वासन नहीं मिलता, आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।
हनुमानगढ़ ज़िले के टिब्बी क्षेत्र के राठीखेड़ा गाँव में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री के ख़िलाफ़ ग्रामीणों व किसानों का विरोध सिर्फ़ एक दिन का गुस्सा नहीं, बल्कि डेढ़ साल से ज़्यादा समय से चल रहा लंबा आंदोलन है।
राठीखेड़ा और आसपास के चक 4 आरके, 5 आरके आदि इलाकों में M/s Dune Ethanol Pvt. Ltd. की लगभग 400–450 करोड़ रुपये की लागत से अनाज आधारित एथेनॉल फैक्ट्री लगाई जा रही है, जिसे एशिया की सबसे बड़ी एथेनॉल यूनिटों में से एक बताया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि इस परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर भूजल दोहन, औद्योगिक गंदा पानी और धुआँ पूरे क्षेत्र के जल, वायु और मिट्टी को प्रदूषित कर देगा, जिससे आने वाले वर्षों में खेत बंजर हो सकते हैं और पीने के पानी का संकट खड़ा हो सकता है।
दूसरी ओर प्रशासन और कंपनी का पक्ष है कि यह प्लांट सभी पर्यावरणीय मानकों और क़ानूनी अनुमतियों के साथ, ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज जैसी तकनीक के साथ लगाया जा रहा है और स्थानीय विकास व रोज़गार के लिए महत्वपूर्ण है।
किसानों की माँगें है या तो फैक्ट्री को पूरी तरह रद्द किया जाए, या कम से कम आबादी और खेती से दूर किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाए, जब तक कि सभी पर्यावरणीय और सामाजिक आशंकाएँ दूर न हों!
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